यह बिहार सरकार के अधीन एक संवैधानिक बोर्ड है जो राज्य में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देता है। जैसे सामान्य स्कूलों के लिए BSEB (Patna Board) है, वैसे ही संस्कृत विद्यालयों (मदरसा बोर्ड की तरह) के लिए BSSB है।
मध्यमा परीक्षा: इस बोर्ड की सबसे प्रमुख परीक्षा 'मध्यमा' है, जिसे सामान्य हाई स्कूल की 10वीं (Matric) के बराबर मान्यता प्राप्त है।
मान्यता: मध्यमा पास करने के बाद छात्र किसी भी कॉलेज में 11वीं या इंटर में एडमिशन ले सकते हैं और सरकारी नौकरी (जैसे SSC, Railway, GD) के लिए भी पात्र होते हैं।
सिलेबस: इसमें संस्कृत भाषा और साहित्य के साथ-साथ सामान्य विषय जैसे गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और हिंदी भी पढ़ाए जाते हैं।
मुख्यालय: इसका मुख्य कार्यालय पटना में स्थित है।
बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी वर्ष 2026 के मध्यमा परीक्षा परिणामों ने इस बार एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। परीक्षा के मुख्य आंकड़े और प्रदर्शन का विवरण नीचे दिया गया है:
| विवरण | आंकड़े |
| कुल सम्मिलित परीक्षार्थी | 23,614 |
| कुल उत्तीर्ण परीक्षार्थी | 20,555 |
| कुल उत्तीर्ण प्रतिशत | 87.05% |
इस वर्ष के परिणामों की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि छात्राओं ने छात्रों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है।
सफल छात्र: 10,053
सफल छात्राएं: 10,502
निष्कर्ष: लड़कियों ने एक बार फिर बाजी मारी है और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी प्रगति को साबित किया है।
शानदार पास प्रतिशत: 87.05% का कुल पास प्रतिशत बोर्ड की बेहतर होती शिक्षा व्यवस्था को दर्शाता है।
समान अवसर: संस्कृत शिक्षा के प्रति छात्रों का बढ़ता रुझान और सफलता की दर बहुत उत्साहजनक है।
अगला कदम: मध्यमा उत्तीर्ण करने वाले सभी छात्र अब 11वीं (इंटर) में नामांकन लेने और SSC GD, रेलवे जैसी सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने के पात्र हैं।
"मध्यमा की डिग्री 10वीं के बराबर है, इसलिए सफल छात्र अब 11वीं या किसी भी सरकारी नौकरी के लिए फॉर्म भर सकते हैं।" यह जानकारी कई छात्रों को नहीं होती। 👊🚀🎓✨☀️