झारखंड एकेडमिक काउंसिल, जिसे हम संक्षेप में JAC (जैक) कहते हैं, राज्य में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा का मुख्य केंद्र है। 10वीं की परीक्षा को 'मैट्रिक' कहा जाता है और यह छात्र के शैक्षिक जीवन का पहला बड़ा पड़ाव होता है। इसी रिजल्ट के आधार पर छात्र तय करते हैं कि उन्हें आगे जाकर डॉक्टर, इंजीनियर, सीए या प्रशासनिक अधिकारी बनना है।
आमतौर पर, JAC मैट्रिक की परीक्षा फरवरी-मार्च के महीने में आयोजित करता है। उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के बाद, परिणाम मई के प्रथम या द्वितीय सप्ताह में घोषित होने की प्रबल संभावना रहती है।
रिजल्ट चेक करने की आधिकारिक वेबसाइट्स:
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jacresults.com (मुख्य वेबसाइट)
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jac.jharkhand.gov.in
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jac.nic.in
इंटरनेट पर रिजल्ट देखना बहुत सरल है, बस नीचे दिए गए चरणों का पालन करें:
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वेबसाइट खोलें: सबसे पहले jacresults.com पर जाएं।
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लिंक चुनें: होमपेज पर 'Results of Annual Secondary Examination - 2026' के लिंक पर क्लिक करें।
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विवरण भरें: अब आपके सामने दो बॉक्स खुलेंगे— Roll Code और Roll Number।
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ध्यान दें: रोल कोड आपके स्कूल का कोड होता है (जैसे: 12345) और रोल नंबर आपकी विशिष्ट पहचान (जैसे: 0001)।
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सबमिट करें: विवरण भरने के बाद 'Submit' बटन पर क्लिक करें।
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मार्कशीट देखें: आपका रिजल्ट स्क्रीन पर आ जाएगा। इसे भविष्य के लिए सुरक्षित (Save) कर लें या प्रिंट निकाल लें।
झारखंड के कई ग्रामीण इलाकों (जैसे मेहरमा, गोड्डा) में कभी-कभी इंटरनेट की समस्या हो जाती है। ऐसे में आप SMS के जरिए भी अपना परिणाम जान सकते हैं:
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अपने मोबाइल के मैसेज बॉक्स में जाएं।
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टाइप करें: JAC10 RollCode + RollNumber
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इसे 56263 पर भेज दें।
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कुछ ही सेकंड में आपको विषयवार अंकों का विवरण मिल जाएगा।
| प्रतिशत (%) | ग्रेड | प्रदर्शन |
|---|---|---|
| 80% या उससे अधिक | A+ | उत्कृष्ट (Excellent) |
| 60% से 80% तक | A | बहुत अच्छा (Very Good) |
| 45% से 60% तक | B | अच्छा (Good) |
| 33% से 45% तक | C | औसत (Average) |
| 33% से कम | D | अनुत्तीर्ण (Fail) |
रिजल्ट आने के बाद सबसे बड़ी चुनौती होती है सही विषय (Stream) का चुनाव करना। यहाँ आपकी सहायता के लिए कुछ विकल्प दिए गए हैं:
क) विज्ञान संकाय (Science Stream)
अगर आप भविष्य में IIT, AIIMS, या रक्षा सेवाओं (NDA) में जाना चाहते हैं, तो विज्ञान चुनें। इसमें दो विकल्प होते हैं:
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PCM (मैथ्स): इंजीनियरिंग के लिए।
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PCB (बायोलॉजी): मेडिकल या डॉक्टर बनने के लिए।
ख) वाणिज्य संकाय (Commerce Stream)
अगर आपकी रुचि व्यापार, बैंकिंग, चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) या स्टॉक मार्केट में है, तो कॉमर्स आपके लिए बेहतरीन विकल्प है।
ग) कला संकाय (Arts/Humanities)
अक्सर लोग इसे कमतर आंकते हैं, लेकिन UPSC (IAS/IPS) या राज्य लोक सेवा आयोग की तैयारी के लिए आर्ट्स सबसे मजबूत आधार है। वकील, शिक्षक और पत्रकार बनने के लिए भी यह उत्तम है।
घ) व्यावसायिक कोर्स (ITI और पॉलिटेक्निक)
यदि आप कम समय में तकनीकी ज्ञान प्राप्त कर नौकरी पाना चाहते हैं, तो 10वीं के बाद पॉलिटेक्निक डिप्लोमा या ITI कोर्स कर सकते हैं।
कई छात्र ऐसे होते हैं जो 10वीं के तुरंत बाद सरकारी नौकरी का सपना देखते हैं। झारखंड और केंद्र सरकार कई ऐसे पद निकालती है:
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SSC GD Constable: बीएसएफ, सीआरपीएफ और अन्य अर्धसैनिक बलों के लिए।
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रेलवे (Railway): ग्रुप डी (Group D) और एमटीएस (MTS) के पदों के लिए।
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झारखंड पुलिस: कांस्टेबल भर्ती के लिए।
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डाक विभाग (Post Office): ग्रामीण डाक सेवक (GDS) के पदों के लिए।
यदि किसी कारणवश आपका रिजल्ट उम्मीद के मुताबिक नहीं रहता, तो निराश न हों।
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स्क्रूटनी (Scrutiny): यदि आपको लगता है कि किसी विषय में अंक कम मिले हैं, तो आप कॉपी की दोबारा जाँच के लिए आवेदन कर सकते हैं।
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कंपार्टमेंटल (Compartmental): यदि आप एक या दो विषय में फेल हो जाते हैं, तो साल बचाने के लिए बोर्ड दोबारा परीक्षा का मौका देता है।
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कुल पास % (Overall Pass %): 2021 से 2023 तक पासिंग प्रतिशत 95% से ऊपर था, लेकिन 2024 और 2025 में परीक्षा पैटर्न और कड़ाई बढ़ने के कारण यह 90% के आसपास आ गया है।
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लड़कियों का प्रदर्शन: आप देख सकते हैं कि हर साल 'लड़कियाँ पास %' का आंकड़ा 'लड़के पास %' से ज्यादा है।
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लड़कियों का दबदबा: पिछले 5 सालों में हर साल लड़कियों का पास प्रतिशत लड़कों से 1% से 2% अधिक रहा है। इसका मतलब है कि लड़कियां अधिक गंभीरता से पढ़ाई कर रही हैं।
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लड़कों में फेल होने की दर: डेटा स्पष्ट रूप से दिखाता है कि लड़कों का फेल प्रतिशत (Fail %) लड़कियों की तुलना में हमेशा 1% ज्यादा रहता है।
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फेल प्रतिशत का अंतर: लड़कों का फेल होने का प्रतिशत (लड़के फेल %) लड़कियों की तुलना में हमेशा 1% से 1.5% अधिक रहता है।
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"आंकड़े बताते हैं कि लड़के गणित और विज्ञान जैसे कठिन विषयों में पिछड़ रहे हैं, जिसके कारण उनका फेल प्रतिशत अधिक है।
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2021-2023 का ट्रेंड: इन वर्षों में पास प्रतिशत बहुत अधिक (95%+) था क्योंकि परीक्षा के पैटर्न और मूल्यांकन में कोविड के कारण रियायतें दी गई थीं।सबसे कम फेल %: वर्ष 2021 में सबसे कम छात्र फेल हुए थे (केवल 4.07%), जिसका मुख्य कारण कोविड-19 के दौरान वैकल्पिक मूल्यांकन पद्धति (Alternative Assessment) थी।
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2024-2025 का बदलाव: अब बोर्ड वापस अपने पुराने सख्त नियमों पर आ गया है, जिससे पास प्रतिशत 90% के आसपास स्थिर हुआ है और फेल होने वालों की संख्या में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है।
| वर्ष (Year) | कुल पास % | लड़कियाँ % | लड़के % |
|---|---|---|---|
| 2025 | 90.39% | 91.00% | 89.70% |
| 2024 | 90.31% | 91.30% | 89.22% |
| 2023 | 95.38% | 95.54% | 95.19% |
| 2022 | 95.60% | 96.13% | 95.06% |
| 2021 | 95.93% | 95.95% | 95.90% |
| वर्ष (Year) | कुल फेल % | लड़कियाँ % | लड़के % |
|---|---|---|---|
| 2025 | 9.61% | 9.00% | 10.30% |
| 2024 | 9.69% | 8.70% | 10.78% |
| 2023 | 4.62% | 4.46% | 4.81% |
| 2022 | 4.40% | 3.87% | 4.94% |
| 2021 | 4.07% | 4.05% | 4.10% |
| जिला | औसत पास % | टॉप प्रदर्शन |
|---|---|---|
| कोडरमा (Koderma) | 99% | लड़कियाँ |
| हजारीबाग (Hazaribagh) | 98% | लड़कियाँ |
| गिरिडीह (Giridih) | 97% | लड़के |
| चतरा (Chatra) | 96% | लड़कियाँ |
| पूर्वी सिंहभूम (E. Singhbhum) | 94% | लड़के |
| रांची (Ranchi) | 93% | बराबरी पर |
| गोड्डा (Godda) | 91% | लड़कियाँ |
| देवघर (Deoghar) | 92% | लड़कियाँ |
| साहिबगंज (Sahibganj) | 89% | लड़के |
| दुमका (Dumka) | 88% | लड़के |
| पाकुड़ (Pakur) | 85% | लड़के |
पिछले 5 सालों के डेटा का विश्लेषण करने पर यह साफ पता चलता है कि लड़कियों का प्रदर्शन (Success Rate) लड़कों से बेहतर रहा है।
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टॉपर्स की संख्या: स्टेट टॉपर लिस्ट में अक्सर लड़कियों की संख्या लड़कों के मुकाबले 60:40 के अनुपात में रहती है।
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पास प्रतिशत: लगभग हर जिले में लड़कियों का पास प्रतिशत लड़कों से 1% से 2% अधिक रहता है।
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फेल होने की दर: लड़कों में फेल होने या 'कंपार्टमेंटल' श्रेणी में आने की दर लड़कियों की तुलना में थोड़ी अधिक देखी गई है।
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कोडरमा: यह जिला पिछले कुछ वर्षों से "झारखंड का एजुकेशन हब" बनकर उभरा है। यहाँ का पास प्रतिशत लगभग 99% तक पहुँच जाता है।
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हजारीबाग: यहाँ के छात्र लगातार मेरिट लिस्ट में अपनी जगह बनाते हैं।
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गिरिडीह: ग्रामीण क्षेत्रों के बावजूद यहाँ के लड़कों ने गणित और विज्ञान में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
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चतरा: इस जिले ने पिछले 3 साल में सबसे तेज़ सुधार दिखाया है।
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रांची: राजधानी होने के नाते यहाँ संसाधनों की कमी नहीं है, जिससे यहाँ का औसत प्रदर्शन हमेशा स्थिर रहता है।
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गोड्डा जिला: यहाँ पिछले साल का पास प्रतिशत लगभग 91.24% था।
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यहाँ की लड़कियों ने लड़कों को लगभग 1.5% के अंतर से पछाड़ा था।
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मेहरमा प्रखंड के छात्र अक्सर जिला टॉपर की सूची में स्थान बनाने के लिए संघर्ष करते हैं, कोचिंग के लिए एक अच्छा अवसर है।
औसतन झारखंड में हर साल 8% से 10% छात्र असफल होते हैं। इसके मुख्य कारण:
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गणित (Maths) और अंग्रेजी (English) में कम अंक आना।
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ग्रामीण क्षेत्रों में विज्ञान के शिक्षकों की कमी।
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परीक्षा के दौरान तनाव (Exam Stress)।
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"नोट: यदि आप या आपके परिचित इस साल मैट्रिक की परीक्षा में असफल रहे हैं या कम अंक आए हैं, तो निराश न हों।